श्रीलंका के इस पहाड़ के नीचे अब भी रखा गया है रावण का शव, नहीं किया गया था सैनिकों द्वारा उनका अंतिम संस्कार

हाल ही में एक रिसर्च के दौरान 50 ऐसा जगह निकाला गया हैं जिसमें दावा है कि उनका रामायण के साथ संबंध हैं। इसके साथ बताया जा रहा है एक गुफा ऐसी भी है जहाँ रामायण का शव का सुरक्षित हैं। श्रीलंका की सरकार ने रामायण में शामिल लंका प्रकरण से जुड़े तमाम स्थलों पर रिसर्च की है, उनकी ऐतिहासिकता सिद्ध कर भविष्य में इन स्थानों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना ली है और इस में उन्होंने भारतीय सरकार की भी मदद ली है।

रामायण तो आप सभी ने देखा होगा उसमें श्री राम जी रावण का वध करते है और लंका का शासन विभीषण को सौंप देते है । अब इसमें सवाल है कि रावण के शव का क्या हुआ , उसका अंतिम संस्कार कहाँ किया गया? किये गए रिसर्च के मुताबिक रावण का सावन आज भी धरती पर मौजूद हैं। रावण का शव ‘ममी’ बनाकर सुरक्षित रखा हुआ है जैसे मिस्र के पिरामिडों में प्राचीन काल के राजाओं के शव रखे जाते थे।

श्रीलंका के आर्कियोलॉजिकल सर्वे में इस बात का जिक्र किया गया था और वो ममी श्रीलंका के रागला जंगलों में रखी हुई बताई जाती है और लोगों द्वारा ऐसा माना जाता है की जब रावण का वध हुए था तब रावण के सैनिकों ने उसे पुनर्जीवित करने के अनेक प्रयास किए पर उन्हें उसमें कामयाबी नहीं मिली । वो अपने राजा के शव को जलाना नहीं चाहते थे।

इस वजह से उनके सैनिकों ने उनके शव को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न रसायनों का इस्तेमाल किया और उसे ममी के रूप में रख दिया । माना जाता है कि रागला के जंगलों में रावण की ममी आज भी रखी हुई है । बता दूँ उस घना जंगल में जहाँ पर हिंसक पशु रहते हैं और ममी के आसपास के इलाके में कई जहरीले सांप भी रहते है।

कुछ लोगो का ये भी कहना है की इस ममी के नीचे रावण का खजाना है पर कई लोग इस बात से सहमत नहीं हैं। क्योंकि इतने वर्षों तक किसी खजाने की जानकारी होने के बाद वहां उसका शेष रहना संभव नहीं। रावण को काफी ताकतवर और पराक्रमी थे इसी कारण रावण की ममी की लंबाई करीब 18 फीट है और साथ ही श्रीलंका में रावण से जुड़े अनेक प्रमाण बताए जाते हैं।

किये गए रिसर्च के अनुसार श्रीलंका में रैगला के जंगलो में एक चट्टान नुमा नामक पहाड़ी इलाका है, जिसमे एक गुफा है और उस गुफा में रावण का शव आज भी सुरक्षित रखा गया है। बता दे की ये रिसर्च श्रीलंका के रामायण रिसर्च सेंटर और सरकारी पर्यटन विभाग ने मिलकर की है ।

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